Yardie
1973 के जमैका की घनी गर्मी और राजनीतिक उथल-पुथल के बीच एक छोटा सा बच्चा अपने भाई की हत्या की रहस्यमय और दर्दनाक गवाह बनता है। तब एक शक्तिशाली डॉन उसे अपने घर ले आता है, बचपन की छांव में उसे सुरक्षा और नया नाम मिलता है, लेकिन उस दर्द की छाया हमेशा साथ रहती है। गली के कानून, वफादारी और बदले की जटिल परतें उस की पहचान को धीरे-धीरे संवारतीं भी हैं और बिगाड़तीं भी हैं।
दहेज़ नसीब की तरह मिली नई ज़िन्दगी में वह जवान होता है, डॉन के छोटे-बड़े कामों में हस्तक्षेप करता है और अपने अतीत की आग को भीतर ही पाले रखता है। दोस्ती और विश्वास की कसौटी पर खरे उतरने की कोशिशें उसे कठोर बनाती हैं, लेकिन बचपन का टीड़ा-मेड़ा दर्द हर फैसले पर असर डालता रहता है। संगीत और संस्कृति का रंग उसके रोज़मर्रा के संघर्षों में भी झलकता है, जिससे कहानी में मानवीय भावनाओं की गर्मी बनी रहती है।
दस साल बाद उसे लंदन भेजा जाता है — एक नए शहर की ठंडी शामें, अलग जीवनशैली और एक अलग तरह का अंडरवर्ल्ड। पर पुराने गुनाह और पुराने वादे दूर नहीं जाते; उनके साये पीछे-पीछे आते हैं। लंदन की सड़कों पर उसे सामना करना पड़ता है अपनी उपलब्धियों, अपनी वफ़ादारियों और उन फैसलों से जो कभी बचपन के दुःख से उभरकर लिए गए थे।
यह फिल्म बदले की तीव्रता, आत्म-खोज और पहचान के द्वंद्व की कहानी है, जहां हर मोड़ पर नऐ खतरे और पुरानी यादें ठहर कर सवाल उठाती हैं। नायक के अंदर चल रहे द्वंद्व और उसके आश्रय के नैतिक दायित्व कहानी को संजीदा और भावुक बनाते हैं। अंत में यह बताती है कि बीता हुआ समय भला चाहे कितना भी काला क्यों न हो, उसके साथ जीना और आगे बढ़ना ही असली जंग है।
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